गाँव बना शहर

अब जब भी गुजरता हूँ उस गाँव से, 
जिंदा पक्की सड़कें हैं, पर कुछ मरा सा, 
चिलचिलाती धूप मे, धरती वो नंगी, 
पीली चमकती घिसी आईना सा...


@© अमन कुमार वर्मा

Comments

Popular posts from this blog

आँखें

मर्द

वोट वाले नेता