हवा में नमीं रहने भी दो...

इन हवाओं में नमी अब रहने भी दो, 
इमारतों की थोड़ी कमी रहने भी दो। 
मिट रहे हैं खेत, जंगल, नदी औ घोंसले, 
भावी के लिए थोड़ी जमीं रहने भी दो। 


@© अमन कुमार वर्मा

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