मैं मुग्ध हुआ मर जाने को

मैं राग-द्वेष से मुक्त हुआ
कुछ रहा न बाकी पाने को।
हृदय माया से तृप्त हुआ
मैं मुग्ध हुआ मर जाने को।।

                       हे राधे!

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