सबके सपने पूरे करने को तुम्हें सोते हुए जगते देखा है। सबकी इच्छा पूरी हो, इसलिए, खुद की इच्छा मार, तुम्हें खुद को ही ठगते देखा है। जीवन मिल सके सबको, इसलिए तुम्हें जीते जी मरते देखा है। तुमने ही तो दी है सबको, आज जो परिवारों की रूपरेखा है। कौन हो तुम कब से सोच रहे हो, सुनो! वही मर्द है ये, जिसे तुमने हर रोज शीशे में देखा है। Happy International Men's Day 🥳 Happy international Men's Day...🥳